जब किसी बैंक खाताधारक की मृत्यु होती है, तो उनके खाते में जमा धनराशि का भुगतान पाने की प्रक्रिया (Death Claim Settlement Process) शुरू करनी होती है। यह प्रक्रिया उस स्थिति पर निर्भर करती है कि खाताधारक ने नामांकित (Nominee) व्यक्ति निर्धारित किया था या नहीं, खाता संयुक्त (Joint Account) है या एकल, तथा खाते में सर्वाइवरशिप मैन्डेट (Either or Survivor / Former or Survivor) जैसी शर्तें हैं। नीचे विभिन्न स्थितियों में पैसे क्लेम करने की विस्तृत जानकारी दी गई है। इसमें बैंक जमा खाते (बचत, चालू, FD आदि) से लेकर सेफ़ डिपॉज़िट लॉकर के Death Claim Settlement तक सभी पहलुओं को शामिल किया गया है।
नामांकित व्यक्ति होने पर मृत्यु दावा प्रक्रिया (Death Claim Settlement Process)

यदि खाताधारक ने अपने बैंक खाते में पहले से किसी नामांकित व्यक्ति (Nominee) का विवरण दे रखा है, तो Death Claim Settlement प्रक्रिया काफी सरल हो जाती है। बैंक नामांकित व्यक्ति को भुगतान करने के लिए बाध्य होते हैं और इसके लिए कोर्ट के उत्तराधिकार प्रमाणपत्र (Succession Certificate) की आवश्यकता नहीं होती। नामिनी होने की स्थिति में बैंक को निम्न दस्तावेज व प्रक्रिया पूरी करने पर राशि जारी कर देनी चाहिए:
- मृत्यु प्रमाण पत्र: बैंक को खाताधारक का मूल मृत्यु प्रमाणपत्र जमा करें (साथ में उसकी कुछ सत्यापित प्रतियां भी रखें)।
- दावा प्रपत्र (Death Claim Settlement Form): संबंधित बैंक द्वारा प्रदान किया गया Death Claim Settlement फॉर्म भरकर जमा करें।
- नामांकित व्यक्ति का पहचान प्रमाण (KYC): नामिनी का फोटो पहचान पत्र और एड्रेस प्रूफ (जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि) दें।
- खाता संबंधी विवरण: मृतक खाताधारक की पासबुक या खाता संख्या, और यदि संभव हो तो बैंक स्टेटमेंट/चेकबुक जैसी जानकारी साथ रखें।
बैंक, सभी आवश्यक दस्तावेज मिलने के बाद, 15 कैलेंडर दिवस के भीतर Death Claim Settlement करने के निर्देशों का पालन करेंगे। भुगतान सीधे नामांकित व्यक्ति को किया जाएगा और इसे बैंक के लिए पूर्ण और वैध भुगतान माना जाएगा। ध्यान दें कि नामांकित व्यक्ति को राशि मिलने के बाद वह कानूनन बाकी कानूनी वारिसों के लाभ के लिए ट्रस्टी की भूमिका में होता है, लेकिन बैंक की ज़िम्मेदारी नामिनी को भुगतान करके पूरी हो जाती है। यदि नामांकित व्यक्ति एक नाबालिग है, तो खाताधारक द्वारा नामांकन के समय जिस संरक्षक (Guardian) को नामित किया गया था, उसे बैंक में अभिभावक के रूप में उपस्थित होकर प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
नॉमिनी नहीं होने पर कानूनी वारिस (Legal Heirs) द्वारा क्लेम कैसे करें?

अगर बैंक खाते में कोई नामांकित व्यक्ति दर्ज नहीं है, तो कानूनी वारिसों (Legal Heirs) को मिलकर बैंक से संपर्क करना होता है। ऐसे मामलों में बैंक को यह सुनिश्चित करना होता है कि सही व्यक्ति/व्यक्ति ही जमा राशि प्राप्त करें। बिना नॉमिनी की स्थिति में निम्न प्रक्रिया अपनाई जाती है:
- बैंक को सूचना एवं प्रारंभिक दस्तावेज: खाताधारक की मृत्यु की सूचना बैंक को दें और मृत्यु प्रमाण पत्र जमा करें ताकि खाते को अस्थायी रूप से फ्रीज़ किया जा सके।
- क्लेम फॉर्म व पहचान पत्र: बैंक से प्राप्त Death Claim Settlement Form भरें और सभी दावाकर्ताओं (वारिसों) के KYC दस्तावेज जमा करें।
- कानूनी वारिस प्रमाणपत्र / घोषणा: अधिकांश मामलों में बैंक कानूनी वारिसों का प्रमाण मांगते हैं। यदि स्थानीय प्राधिकारी (तहसील/राजस्व विभाग) द्वारा कानूनी वारिस प्रमाणपत्र जारी किया गया है तो उसे जमा करें। वैकल्पिक रूप से, बैंक एक संयुक्त घोषणा पत्र या हलफ़नामा ले सकते हैं जिसमें परिवार के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर और मृतक के वारिस होने की पुष्टि हो। दो स्वतंत्र गवाहों के प्रमाण भी इसमें शामिल हो सकते हैं।
- अनापत्ति पत्र (NoC): यदि एक से अधिक कानूनी वारिस हैं, तो जो वारिस क्लेम नहीं कर रहे हैं उनसे धनराशि प्राप्त करने पर कोई आपत्ति नहीं होने का लिखित अनापत्ति प्रमाणपत्र बैंक मांग सकता है।
- इंडेम्निटी बॉण्ड (Indemnity Bond): बैंक अक्सर दावा राशि के बदले एक क्षतिपूर्ति बॉन्ड (Indemnity Bond) भरवाते हैं, जिसमें दावाकर्ता यह वचन देते हैं कि अगर भविष्य में कोई अन्य दावा करता है तो वे बैंक को क्षतिपूर्ति देंगे।
कानूनी वारिस प्रमाणपत्र की ज़रूरत कब पड़ती है? इसका निर्भरता Death Claim Settlement राशि पर होती है। यदि जमा राशि तुलनात्मक रूप से कम है, तो बैंक सरल प्रक्रिया के तहत बिना कोर्ट के आदेश के भी भुगतान कर सकते हैं। वर्तमान RBI दिशानिर्देशों के अनुसार बिना नामांकन वाले मामलों में ₹15 लाख तक की राशि के दावों को आसान दस्तावेज़ी प्रक्रिया के जरिए निपटाने को कहा गया है। इन मामलों में उपरोक्त हलफ़नामा, कानूनी वारिस प्रमाणपत्र या घोषणा-पत्र आदि से काम चल सकता है। लेकिन यदि राशि अधिक हो (जैसे ₹15 लाख से ऊपर) या उत्तराधिकार को लेकर कोई विवाद की संभावना हो, तो बैंक उत्तराधिकार प्रमाणपत्र (Succession Certificate) या कोर्ट का आदेश लाने को कह सकते हैं। उत्तराधिकार प्रमाणपत्र न्यायालय द्वारा भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के तहत जारी किया जाने वाला दस्तावेज है जिसमें निर्णायक रूप से घोषित होता है कि कौन लोग संपत्ति के हक़दार हैं। बड़ी धनराशि या विवाद की स्थिति में बैंक बिना उत्तराधिकार प्रमाणपत्र के भुगतान करने से बचते हैं ताकि भविष्य में कोई कानूनी जटिलता न हो।
ध्यान रखें कि बिना नामांकन वाले Death Claim Settlement में प्रक्रिया थोड़ा विस्तृत हो सकती है और इसमें समय लग सकता है। फिर भी RBI के नए नियमों के तहत बैंकों को सभी दस्तावेज प्राप्त होने के बाद 15 दिनों के भीतर ऐसे क्लेम निपटाने हैं, ताकि परिवार को लंबा इंतज़ार न करना पड़े। परिवार को चाहिए कि सभी आवश्यक कागजात एक साथ जुटाकर बैंक में जमा करें, ताकि बार-बार दस्तावेजों के अभाव में आना-जाना न करना पड़े।
सर्वाइवरशिप मैन्डेट (Either or Survivor / Former or Survivor) का क्या मतलब है?

बैंक के संयुक्त खातों में सर्वाइवरशिप क्लॉज़ (Survivorship Mandate) एक ऐसा ऑप्शन होता है जिससे खातेदारों के बीच यह व्यवस्था होती है कि एक खाताधारक की मृत्यु पर खाता स्वचालित रूप से जीवित खाताधारक को संचालित करने का अधिकार दे देगा। सामान्यतः संयुक्त खाते खोलते समय Either or Survivor (E or S), Former or Survivor जैसे विकल्प चुनने का मौका मिलता है:
- Either or Survivor (या Anyone or Survivors): इस प्रकार के संयुक्त खाते में सभी खाताधारक स्वतंत्र रूप से खाते का संचालन कर सकते हैं। यदि खाता धारकों में से किसी एक का निधन हो जाए, तो शेष जीवित धारक बिना रुकावट खाते को चलाते रह सकते हैं और रकम निकाल सकते हैं। बैंक के लिए जीवित धारक को भुगतान करना सीधा होता है और इसके लिए किसी अदालत के आदेश की आवश्यकता नहीं होती।
- Former or Survivor: इस मोड में खाते का संचालन सामान्यतः पहले (प्रथम नामित) खाताधारक द्वारा किया जाता है। पहले खाताधारक के निधन के बाद दूसरे (उत्तरवर्ती) खाताधारक को खाते से पैसा निकालने अथवा संचालन का पूर्ण अधिकार मिलता है। उसे बैंक में मृत्यु प्रमाण पत्र जमा करने जैसी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं, जिसके बाद बैंक उसे खाते की शेष राशि प्रदान कर देता है।
सर्वाइवरशिप वाले खातों का लाभ यह है कि बैंक को भुगतान करने में कोई कानूनी दिक्कत नहीं आती और न ही किसी उत्तराधिकार प्रमाणपत्र/वसीयत की प्रोबेट की आवश्यकता पड़ती है। यह क्लॉज़ खाताधारकों के बीच पहले से सहमति बनाकर रखा जाता है और मृत्यु के Death Claim Settlement को आसान बना देता है। अगर संयुक्त खाते में सर्वाइवरशिप मैन्डेट शामिल है (जैसे E or S या Former or Survivor), तो बैंक द्वारा जीवित खाताधारक/धारकों को भुगतान करना बैंक के लिए वैध डिस्चार्ज माना जाता है। इसका अर्थ है बैंक ने अपना दायित्व पूरा कर दिया और शेष राशि पर जीवित धारक का अधिकार स्थापित हो गया।
ध्यान दें: कुछ खाते Jointly Operated (सभी धारकों के संयुक्त हस्ताक्षर से संचालित) होते हैं, जिनमें सर्वाइवरशिप क्लॉज़ नहीं होता। ऐसे मामलों में किसी एक धारक की मृत्यु पर शेष जीवित धारक स्वतः पैसा निकाल नहीं सकते; उन्हें ऊपर वर्णित बिना नॉमिनी वाली प्रक्रिया (कानूनी वारिसों के माध्यम से) अपनानी होगी या सभी संबंधित पक्षों की सहमति से बैंक में दावा करना होगा।
बैंक लॉकर के सेटलमेंट की प्रक्रिया

सेफ़ डिपॉज़िट लॉकर भी बैंकिंग सेवा का हिस्सा है, और खाताधारक की मृत्यु होने पर लॉकर के सामग्री के दावे (Death Claim Settlement in Case of Locker) का निपटारा भी महत्वपूर्ण है। लॉकर के लिए निम्न स्थितियाँ व प्रक्रियाएँ होती हैं:
- यदि लॉकर में नामांकन या सर्वाइवरशिप है: अधिकांश बैंकों में लॉकर के लिए भी नामांकन सुविधा होती है। अगर मृतक ने लॉकर के लिए किसी को नामांकित किया है (या लॉकर संयुक्त नाम से है और ‘सर्वाइवर’ क्लॉज़ लागू है), तो उस नामांकित व्यक्ति या जीवित संयुक्त धारक को कुछ औपचारिकताओं के बाद लॉकर खोलने और सामग्री प्राप्त करने की अनुमति मिलती है। बैंक मृत्यु प्रमाणपत्र, नामिनी/सर्वाइवर का पहचान प्रमाण आदि सत्यापित करने के बाद लॉकर को खोलने की प्रक्रिया आरंभ करेंगे। आमतौर पर यह प्रक्रिया बैंक अधिकारी की उपस्थिति में की जाती है, जहां लॉकर खोलकर उसकी सामग्री की सूची (इन्वेंटरी) तैयार की जाती है और नामांकित व्यक्ति को सौंप दी जाती है। इन परिस्थितियों में भी बैंक किसी कोर्ट के आदेश की मांग नहीं करते, जिससे परिवार को त्वरित राहत मिलती है।
- यदि कोई नामांकित व्यक्ति नहीं है: ऐसे मामलों में लॉकर की सामग्री कानूनी वारिसों को ही मिलेगी, लेकिन प्रक्रिया में सुरक्षा की दृष्टि से अधिक दस्तावेज शामिल होंगे। वारिसों को बैंक में मृत्यु प्रमाणपत्र के साथ यह प्रमाण देना होगा कि वे ही असली कानूनी वारिस हैं (जैसे ऊपर बताया गया कानूनी वारिस प्रमाणपत्र या सभी वारिसों द्वारा हस्ताक्षरित संयुक्त घोषणा)। बैंक संभवतः सभी प्रमुख वारिसों की मौजूदगी में या उनके अधिकृत प्रतिनिधि की मौजूदगी में लॉकर को खोलेगा। सामग्री की सूची बनाकर, अनापत्ति पत्र और इंडेम्निटी बॉन्ड लेने के बाद, वह सामग्री वारिसों को सौंप दी जाएगी। अगर वारिसों में विवाद हो या प्रस्तुत दस्तावेज संदेहपूर्ण हों, तो बैंक सुरक्षित पक्ष लेते हुए कोर्ट का आदेश या उत्तराधिकार प्रमाणपत्र मांग सकता है, विशेषकर यदि लॉकर में रखी संपत्ति का मूल्य अधिक हो या विवाद की संभावना हो।
RBI के अक्टूबर 2025 के निर्देशों के अनुसार, लॉकर Death Claim Settlement भी जमा खातों की तरह तेज़ी से होना चाहिए। बैंक को सभी ज़रूरी दस्तावेज मिलने के बाद 15 दिनों के भीतर लॉकर संबंधी Death Claim Settlement प्रक्रिया पूरी कर लेनी है। यदि बैंक अनावश्यक देरी करते हैं, तो उन्हें ग्राहक को मुआवज़ा देना होगा – जमा खातों के मामले में देरी पर जहां अतिरिक्त ब्याज़ (बैंक रेट + 4%) देना होगा, वहीं लॉकर के मामलों में ₹5,000 प्रति दिन के हिसाब से जुर्माना/मुआवज़ा देना होगा। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि बैंक समयबद्ध तरीके से परिवार को लॉकर की सामग्री उपलब्ध कराएं।
बैंकर की टिप: दस्तावेजों की तैयारी और जरूरी सावधानियाँ

जब भी आप बैंक खाताधारक की मृत्यु पर पैसा या लॉकर क्लेम करने जाएँ, अच्छी तैयारी के साथ जाएँ ताकि बार-बार बैंक के चक्कर न लगाने पड़ें। एक बैंक प्रबंधक के अनुसार, निम्न बातों का ध्यान रखना उपयोगी है:
- मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रतियां: हमेशा मृत्यु प्रमाण पत्र की कई सत्यापित प्रतियां अपने पास रखें (कम से कम 5-10 प्रतियां)। बैंक को एक मूल या सत्यापित प्रति जमा करनी पड़ती है और बीमा, म्यूचुअल फंड, डीमैट जैसे अन्य संस्थानों में भी ये काम आएंगी। नगर निगम/प्राधिकरण से कुछ अतिरिक्त कॉपियां बनवा कर रखें।
- पहली बैठक में आवश्यक दस्तावेज: बैंक मैनेजर से मिलने जाते समय निम्न मूल दस्तावेज एवं उनकी फोटोकॉपी साथ लें:
- मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र (मूल और प्रतियां)
- मृतक का पहचान प्रमाण (जैसे आधार, पैन) और एड्रेस प्रूफ़ – कई बार बैंक रिकॉर्ड अपडेट करने हेतु मांगते हैं
- आपका अपना पहचान एवं पता प्रमाण (दावाकर्ता/नामिनी का KYC)
- बैंक पासबुक, खाता संख्या या फ़िक्स्ड डिपॉज़िट रसीद जैसी जानकारी (जिससे बैंक कर्मचारी खाते की पुष्टि कर सकें)
- यदि लॉकर है तो लॉकर की चाबी और लॉकर अनुबंध की कॉपी (यदि उपलब्ध हो)
- अन्य सहायक दस्तावेज: जैसे राशन कार्ड/परिवार पहचान पत्र (वारिसों के संबंध स्पष्ट करने हेतु), विवाह प्रमाणपत्र (यदि पत्नी द्वारा दावा), जन्म प्रमाणपत्र (यदि संतान द्वारा दावा) आदि जो संबंध साबित कर सकें।
- बैंक द्वारा प्रदान किए जाने वाले फार्म – जैसे क्लेम फॉर्म, इंडेम्निटी बॉन्ड, अनापत्ति पत्र – इन्हें बैंक से लेकर पूर्ण रूप से भरकर जमा करें।
- बैंक से अग्रिम मार्गदर्शन: यदि संभव हो तो बैंक में पहले फोन करके या वेबसाइट चेक करके आवश्यक दस्तावेजों की सूची जान लें। प्रत्येक बैंक के फॉर्मेट थोड़े अलग हो सकते हैं, पर मुख्य तौर पर उपरोक्त डॉक्यूमेंट काफी होते हैं। बैंक अधिकारी से एक बार पुष्टि कर लें कि और किसी विशेष कागज़ात (जैसे गज़ट नोटिफिकेशन, स्टाम्प पेपर पर हलफ़नामा आदि) की जरूरत तो नहीं।
- नामांकन और रिकॉर्ड अपडेट रखें: भविष्य की सुविधा हेतु यह टिप है कि खाताधारक अपने खाते/FD/लॉकर में नामांकन जरूर कराएं। इससे मृत्यु के बाद परिवार को आसान क्लेम सेटलमेंट मिलता है और अनावश्यक कानूनी कठिनाइयों से बचा जा सकता है। साथ ही, खाते को Either or Survivor मोड में रखने से संयुक्त खाताधारकों को सुरक्षा मिलती है।
यदि मृत खाताधारक पर कोई लोन चल रहा हो तो क्या होगा?
बैंक खाताधारक की मृत्यु होने पर यह समझना बेहद ज़रूरी है कि लोन अपने-आप समाप्त नहीं होता। लोन एक कानूनी दायित्व (Legal Liability) होता है, और उसकी स्थिति लोन के प्रकार पर निर्भर करती है।
यदि लोन सिंगल बॉरोअर (Single Borrower) के नाम पर था
अगर मृत व्यक्ति ने Personal Loan, Home Loan, Car Loan या Education Loan अकेले लिया था, तो:
- बैंक सबसे पहले यह जाँच करेगा कि
लोन के साथ कोई बीमा (Loan Protection / Credit Life Insurance) जुड़ा हुआ था या नहीं। - यदि बीमा था, तो बीमा कंपनी बकाया लोन राशि का भुगतान कर देती है और
कानूनी वारिसों पर लोन का बोझ नहीं आता। - यदि कोई बीमा नहीं था, तो बैंक लोन की वसूली के लिए:
- मृत व्यक्ति की संपत्ति (FD, Savings Balance आदि) से समायोजन कर सकता है
- या कानूनी वारिसों से संपर्क कर सकता है
⚠️ महत्वपूर्ण बात:
कानूनी वारिस व्यक्तिगत रूप से लोन चुकाने के लिए बाध्य नहीं होते,
लेकिन यदि वे मृत व्यक्ति की संपत्ति (Assets) प्राप्त करते हैं,
तो लोन की वसूली उसी संपत्ति की सीमा तक की जा सकती है।
यदि लोन Joint Loan था (Co-Borrower के साथ)
यदि लोन Joint Loan था (जैसे पति-पत्नी का Home Loan):
- जीवित Co-Borrower पर पूरे लोन की ज़िम्मेदारी आ जाती है
- बैंक सीधे Co-Borrower से EMI जारी रखने को कहेगा
- अगर लोन बीमित है, तो बीमा पहले लागू होगा
👉 Joint Loan में “Survivor” पर लोन जारी रहना सामान्य बैंकिंग नियम है।
यदि कोई Guarantor था
- Guarantor होने का अर्थ है कि
बैंक लोन न चुकाने की स्थिति में गारंटर से वसूली कर सकता है - मृत व्यक्ति की मृत्यु के बाद यदि लोन unpaid रहता है,
तो बैंक Guarantor को legally approach कर सकता है
Banker’s Tip (Loan से जुड़ा)
- मृत्यु के बाद तुरंत बैंक को सूचना दें
- EMI auto-debit को रोकने के लिए लिखित आवेदन दें
- Loan Insurance policy की कॉपी तलाशें
- बिना सलाह के कोई EMI भुगतान न करें — पहले स्थिति स्पष्ट करें
यदि मृत व्यक्ति के पास ATM Card या Credit Card हो तो क्या करें?
यह हिस्सा अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, लेकिन बहुत संवेदनशील है।
ATM / Debit Card के मामले में
- मृत व्यक्ति का ATM / Debit Card तुरंत उपयोग करना गैर-कानूनी है
- भले ही PIN परिवार के किसी सदस्य को पता हो,
मृत्यु के बाद कार्ड का उपयोग धोखाधड़ी माना जाता है - बैंक को सूचना मिलते ही:
- खाता Freeze किया जाता है
- ATM / Debit Card स्वतः block हो जाता है
👉 गलती से भी ATM से पैसा न निकालें,
क्योंकि बाद में बैंक उस राशि की recovery कर सकता है।
Credit Card के मामले में
Credit Card के मामले में स्थिति थोड़ी अलग होती है:
- Credit Card एक Unsecured Loan की तरह माना जाता है
- मृत्यु की सूचना मिलने पर:
- बैंक Card को तुरंत बंद कर देता है
- बकाया राशि की गणना की जाती है
अब सवाल: Credit Card का बकाया कौन चुकाएगा?
- यदि Credit Card के साथ Credit Shield / Insurance जुड़ा था:
- बीमा कंपनी बकाया राशि चुका देती है
- यदि कोई बीमा नहीं था:
- बैंक कानूनी वारिसों से व्यक्तिगत रूप से भुगतान नहीं मांग सकता
- लेकिन यदि मृत व्यक्ति की संपत्ति से settlement हो रहा है,
तो बैंक उस संपत्ति से adjustment कर सकता है
⚠️ महत्वपूर्ण:
कानूनी वारिस Credit Card debt के लिए
स्वयं जिम्मेदार नहीं होते, जब तक उन्होंने कोई undertaking न दी हो।
Credit Card से जुड़ी Banker’s Practical Advice
- मृत्यु के बाद तुरंत Customer Care / Branch को सूचना दें
- Death Certificate की copy जमा करें
- Card physically काटकर सुरक्षित रखें
- Written confirmation लें कि card बंद कर दिया गया है
एक जरूरी कानूनी और व्यवहारिक चेतावनी
मृत्यु के बाद मृत व्यक्ति के नाम से
कोई भी बैंकिंग लेन-देन करना
(ATM withdrawal, Credit Card swipe, Online payment)
कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है।
इसलिए हमेशा:
- पहले बैंक को सूचना दें
- खाते को freeze करवाएँ
- फिर विधिवत claim प्रक्रिया अपनाएँ
निष्कर्ष (Loan और Cards के संदर्भ में)
- मृत्यु के बाद लोन समाप्त नहीं होता, उसकी स्थिति जाँचना ज़रूरी है
- Loan Insurance होने पर परिवार सुरक्षित रहता है
- ATM और Credit Card का उपयोग पूरी तरह बंद कर देना चाहिए
- सही समय पर बैंक को सूचना देने से
कानूनी और वित्तीय परेशानियों से बचा जा सकता है
अंत में, बैंक खाताधारक की मृत्यु होने पर पैसे क्लेम करने की जिम्मेदारी संभलकर और धैर्यपूर्वक करें। उपरोक्त प्रक्रियाओं का पालन करने से आप सुनिश्चित करेंगे कि Death Claim Settlement सही ढंग से और तेज़ी से निपट जाए। भारतीय रिज़र्व बैंक के नवीन दिशानिर्देश बैंक ग्राहकों के हित में बनाए गए हैं, जो नामांकित व्यक्तियों और कानूनी वारिसों के लिए Death Claim Settlement प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाते हैं। इन नियमों की जानकारी रखना और बैंक के साथ सहयोग करना आपके लिए इस कठिन समय में आर्थिक मामलों को थोड़ा आसान बना सकता है।
यह जानकारी भारतीय रिज़र्व बैंक के बैंकिंग ग्राहक संरक्षण दिशानिर्देशों के अनुरूप तैयार की गई है।
Frequently Asked Questions (FAQs).
Q1. बैंक खाताधारक की मृत्यु के बाद सबसे पहला कदम क्या होना चाहिए?
उत्तर: सबसे पहले संबंधित बैंक शाखा को लिखित रूप में मृत्यु की सूचना दें और मृत्यु प्रमाण पत्र जमा करें। इससे खाते/कार्ड को सुरक्षित किया जाता है और आगे की Death Claim Settlement प्रक्रिया शुरू होती है।
Q2. Nominee होने पर क्या कानूनी वारिस प्रमाणपत्र की ज़रूरत पड़ती है?
उत्तर: नहीं। यदि खाते में वैध Nominee दर्ज है, तो बैंक Nominee को भुगतान करता है और सामान्यतः कानूनी वारिस प्रमाणपत्र नहीं मांगता।
Q3. Nominee नहीं होने पर बैंक कौन-से दस्तावेज़ मांगता है?
उत्तर: Nominee न होने पर बैंक निम्न में से एक या अधिक दस्तावेज़ मांग सकता है:
1. कानूनी वारिस प्रमाणपत्र
2. सभी वारिसों की संयुक्त घोषणा/हलफ़नामा
3. अनापत्ति पत्र (No Objection)
4. इंडेम्निटी बॉन्ड
5. राशि अधिक होने या विवाद की स्थिति में उत्तराधिकार प्रमाणपत्र भी मांगा जा सकता है।
Q4. Joint Account में “Either or Survivor” का क्या लाभ है?
उत्तर: इस मैन्डेट में किसी एक खाताधारक की मृत्यु पर जीवित खाताधारक खाते को बिना रुकावट संचालित कर सकता है और बैंक उसे भुगतान कर देता है।
Q5. क्या Joint Account में Nominee जरूरी होता है?
उत्तर: अनिवार्य नहीं, लेकिन सलाह दी जाती है। Survivorship Mandate होने पर Nominee की भूमिका सीमित हो जाती है, फिर भी Nomination रखने से clarity बढ़ती है।
Q6. Fixed Deposit (FD) और Recurring Deposit (RD) का क्लेम कैसे होता है?
उत्तर:
1. Nominee होने पर: Nominee को भुगतान
2. Nominee न होने पर: कानूनी वारिस प्रक्रिया
FD/RD की maturity से पहले भी Death Claim Settlement किया जा सकता है; बैंक penalty सामान्यतः नहीं लगाता।
Q7. Bank Locker के सेटलमेंट की प्रक्रिया क्या है?
उत्तर:
1. Nominee/Survivor होने पर: बैंक अधिकारी की मौजूदगी में लॉकर खोला जाता है और inventory बनती है।
2. Nominee न होने पर: सभी वारिसों की उपस्थिति/दस्तावेज़ों के साथ लॉकर खोला जाता है; आवश्यकता पड़ने पर कोर्ट आदेश मांगा जा सकता है।
Q8. मृत्यु के बाद ATM/Debit Card का क्या करना चाहिए?
उत्तर: ATM/Debit Card का उपयोग बिल्कुल न करें। तुरंत बैंक को सूचना देकर कार्ड block करवाएँ। मृत्यु के बाद कार्ड से निकासी करना गैर-कानूनी माना जा सकता है।
Q9. Credit Card का बकाया कौन चुकाएगा?
उत्तर:
1. Credit Card पर बीमा (Credit Shield) होने पर बीमा बकाया चुका देता है।
2. बीमा न होने पर बैंक व्यक्तिगत रूप से वारिसों से भुगतान नहीं मांग सकता, लेकिन मृतक की संपत्ति से समायोजन हो सकता है।
Q10. यदि मृत व्यक्ति पर Loan चल रहा हो तो क्या होगा?
उत्तर:
1. Loan Insurance होने पर बीमा बकाया चुका देता है।
2. Joint Loan में जीवित Co-Borrower जिम्मेदार होता है।
3. Single Loan में वसूली मृतक की संपत्ति की सीमा तक हो सकती है।

