भारत सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 60 वर्ष पुराने आयकर अधिनियम 1961 को प्रतिस्थापित करते हुए आयकर अधिनियम 2025 लागू किया है। यह नया कानून 21 अगस्त 2025 को भारत के राजपत्र में अधिसूचित हुआ और 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गया है। इस लेख में हम इस नए अधिनियम के प्रमुख बदलावों को सरल हिंदी में समझेंगे।
Effective Date
1 April 2026
नया अधिनियम इसी तिथि से लागू
Main Changes
TDS / TCS / Forms
दरें, फॉर्म और रिपोर्टिंग में बड़े संशोधन
Official Source
Income Tax Dept.
आयकर अधिनियम 2025 आधारित
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नई शब्दावली – “कर वर्ष” का परिचय

नए आयकर अधिनियम 2025 में सबसे पहला बड़ा बदलाव शब्दावली में आया है। पुराने अधिनियम 1961 में “निर्धारण वर्ष (Assessment Year)” और “पूर्व वर्ष (Previous Year)” जैसे दो अलग-अलग शब्दों का उपयोग होता था, जो आम करदाताओं के लिए अक्सर भ्रम का कारण बनते थे।

नए अधिनियम में इन दोनों को हटाकर एक सरल शब्द “कर वर्ष (Tax Year)” लाया गया है। कर वर्ष का अर्थ है – 1 अप्रैल से 31 मार्च तक का 12 महीने का वह कालखंड जिसमें आय अर्जित की जाती है, दर्ज की जाती है और उस पर कर लगाया जाता है।

पुरानी व्यवस्था
2 शब्द
निर्धारण वर्ष + पूर्व वर्ष
नई व्यवस्था
1 शब्द
सिर्फ “कर वर्ष” – सरल और स्पष्ट
कर वर्ष 2026-27
अप्रैल–मार्च
1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027
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TDS दरों में बदलाव

स्रोत पर कर कटौती (TDS) की दरों में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं। आइए प्रमुख बदलावों को विस्तार से समझें:

नकद निकासी पर TDS (धारा 393(3))

पहले बैंक से नकद निकासी पर TDS की व्यवस्था ITR फाइलिंग इतिहास से जुड़ी थी। नए अधिनियम में यह शर्त पूरी तरह हटा दी गई है। अब हर व्यक्ति पर – चाहे उसने पहले ITR भरी हो या नहीं – नकद निकासी पर TDS लागू होगा।

श्रेणीसीमा (Threshold)TDS दरविशेष नोट
सहकारी समितियाँ₹3 करोड़ और उससे अधिक2%सीमा पार होने पर संपूर्ण निकासी पर TDS
अन्य सभी (व्यक्ति, फर्म आदि)₹1 करोड़ और उससे अधिक2%ITR इतिहास की शर्त समाप्त

महत्वपूर्ण बदलाव – सीमा पार होने पर

पुराने नियम में केवल सीमा से अधिक की राशि पर TDS कटता था। नए नियम में जैसे ही वार्षिक नकद निकासी की कुल सीमा पार होती है, पूरी निकासी की राशि पर TDS देय होगा – न कि केवल अतिरिक्त राशि पर।

ठेकेदारों को भुगतान पर TDS (धारा 393(1))

अब मानव संसाधन (Manpower) की आपूर्ति को भी स्पष्ट रूप से ठेका कार्य के अंतर्गत शामिल किया गया है।

श्रेणीTDS दरसीमा
व्यक्ति / HUF1%₹30,000 प्रति ठेका या ₹1,00,000 सालाना
अन्य (कंपनी, फर्म आदि)2%₹30,000 प्रति ठेका या ₹1,00,000 सालाना

TDS दर – संपूर्ण चार्ट (मुख्य श्रेणियाँ)

क्र.आय का प्रकारसीमाTDS दर
1वेतनस्लैब दर
2PF में जमा शेष (कर्मचारी)₹50,00010%
3प्रतिभूतियों पर ब्याज₹10,00010%
4लाभांश (व्यक्तिगत शेयरधारक)₹10,00010%
5बैंक ब्याज (वरिष्ठ नागरिक)₹1,00,00010%
6बैंक ब्याज (अन्य)₹50,00010%
7लॉटरी/जुए की जीत₹10,000/लेन-देन31.20%
8ऑनलाइन गेम जीतकोई सीमा नहीं31.20%
9किराया (भूमि/भवन)₹50,000/माह10%
10अचल संपत्ति हस्तांतरण₹50,00,0001%
11पेशेवर/तकनीकी शुल्क₹50,0002% या 10%
12म्यूचुअल फंड आय₹10,00010%
13ई-कॉमर्स भुगतान₹5,00,000 (व्यक्ति)0.1%
14वर्चुअल डिजिटल संपत्ति₹50,000 (Ind/HUF)1%
15फर्म के साझेदार को वेतन₹20,00010%

नोट: PAN अनुपलब्ध या निष्क्रिय होने पर TDS 20% की उच्च दर पर काटा जाएगा। अनिवासियों के भुगतान पर 4% स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर + अधिभार भी लागू।

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TCS दरों में बदलाव (धारा 394)

स्रोत पर संग्रहित कर (TCS) की दरों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। विदेशी रेमिटेंस और कुछ अन्य लेन-देन में दरें सरल और एकसमान बनाई गई हैं।

लेन-देन का प्रकारपुरानी दरनई दरपरिवर्तन
LRS – शिक्षा/चिकित्सा रेमिटेंस (₹10 लाख से अधिक)5%2%↓ कमी
विदेशी टूर पैकेजअलग-अलग2% (एकसमान)सरलीकरण
शराब, स्क्रैप, खनिज (कोयला, लिग्नाइट, लौह अयस्क)1%2%↑ वृद्धि
तेंदू पत्ते5%2%↓ कमी
अन्य सभी विदेशी रेमिटेंस (LRS)20%उच्च दर
मोटर वाहन बिक्री (₹10 लाख से अधिक)1%
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वेतन अनुलाभ (Perquisites) में बदलाव – नियम 15

कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं (Perquisites) पर कर गणना के नियम भी बदले हैं। आइए तीन प्रमुख अनुलाभों को समझें:

बच्चों की शिक्षा सुविधा

यदि नियोक्ता कर्मचारी के बच्चे को निःशुल्क शिक्षा देता है, तो ऐसी सुविधा का मूल्य, जो ₹3,000 प्रति माह प्रति बच्चे से अधिक हो, कर योग्य अनुलाभ माना जाएगा। यह मूल्यांकन स्थानीय समकक्ष संस्था की शुल्क के आधार पर होगा।

उपहार / वाउचर

नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को किसी भी अवसर पर दिए गए उपहार, वाउचर या टोकन का कुल वार्षिक मूल्य यदि ₹15,000 से कम है, तो वह पूर्णतः कर-मुक्त होगा। ₹15,000 से अधिक होने पर पूरी राशि कर योग्य होगी।

ब्याज-मुक्त / रियायती ऋण

  • चिकित्सा उपचार हेतु ऋण पर कोई कर नहीं लगेगा।
  • ₹2,00,000 तक के कुल ऋण पर कोई कर नहीं।
  • अन्य मामलों में SBI की प्रचलित ब्याज दर और वास्तव में चुकाई दर के अंतर पर कर लगेगा।
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नए फॉर्म – फॉर्म 121 और फॉर्म 97

फॉर्म 121 – पुराने फॉर्म 15G/15H का स्थान नया

पहले TDS से छूट के लिए आयु के आधार पर दो अलग फॉर्म भरने पड़ते थे – 60 वर्ष से कम के लिए फॉर्म 15G और 60+ के लिए फॉर्म 15H। नए अधिनियम में इन दोनों को हटाकर एक सरल फॉर्म 121 लाया गया है जो सभी के लिए समान है।

पुरानी व्यवस्था (अधिनियम 1961)नई व्यवस्था (अधिनियम 2025)
फॉर्म 15G – 60 वर्ष से कम के लिएफॉर्म 121 – सभी आयु वर्ग के लिए (एकल)
फॉर्म 15H – 60 वर्ष और उससे अधिक के लिए

फॉर्म 121 पर UIN (Unique Identification Number) आवंटित होगा जिसकी संरचना: अनुक्रम संख्या + कर वर्ष + TAN होगी।

उदाहरण: D000000001202627MUMN12345A

  • PAN अनिवार्य है – बिना PAN के घोषणापत्र अमान्य होगा।
  • कंपनी और फर्म फॉर्म 121 दाखिल नहीं कर सकते।
  • अनिवासी भारतीय इसे दाखिल करने के पात्र नहीं हैं।
  • FD की अनुसूचित तारीख से पहले यह फॉर्म बैंक को देना अनिवार्य है।

फॉर्म 97 – पुराने फॉर्म 60 का स्थान नया

जिन व्यक्तियों के पास PAN नहीं है, वे अब फॉर्म 97 भरकर निर्धारित लेन-देन कर सकते हैं। इस फॉर्म को स्वीकार करने वाले को अब फॉर्म 98 में अर्धवार्षिक विवरण आयकर विभाग को देना होगा।

फॉर्म 98 की देय तिथियाँ: 31 अक्टूबर (कर वर्ष के दौरान) और 30 अप्रैल (अगले कर वर्ष में)।

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अन्य महत्वपूर्ण संशोधन

अनिवासी से अचल संपत्ति खरीद – सरलीकरण बदलाव

  • अनिवासी (Non-Resident) से संपत्ति खरीदने पर अब खरीदार को TAN लेने की जरूरत नहीं।
  • केवल PAN से ही TDS की रिपोर्टिंग हो सकेगी।
  • यह सुविधा 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगी।

MACT ब्याज पर पूर्ण छूट नया

  • मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) द्वारा दिए गए मुआवजे पर मिलने वाला ब्याज अब पूर्णतः कर-मुक्त होगा।
  • ऐसे भुगतान पर TDS नहीं काटा जाएगा।
  • यह 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी है।
  • पीड़ितों को रिफंड के लिए ITR दाखिल करने की आवश्यकता नहीं होगी।

वित्तीय लेन-देन विवरण (SFT) – फॉर्म 165

बड़े लेन-देन की रिपोर्टिंग के लिए सीमाएँ इस प्रकार हैं:

लेन-देनPAN के साथPAN के बिना
बचत खाता नकद जमा₹10 लाख₹5 लाख
चालू खाता नकद जमा/निकासी₹50 लाख₹50 लाख
बैंक ड्राफ्ट / PO / नकद खरीद₹10 लाख₹5 लाख
अचल संपत्ति लेन-देन₹45 लाख₹45 लाख
स्टांप पेपर खरीद₹2 लाख₹1 लाख
बीमा प्रीमियम₹5 लाख₹2.5 लाख
विदेशी मुद्रा लेन-देन₹10 लाख₹5 लाख
उपहार/संयुक्त विकास सौदे₹45 लाख₹45 लाख

SFT न भरने पर दंड

  • नोटिस के बाद भी SFT न भरने पर: ₹1,000 प्रति दिन (अधिकतम ₹1,00,000)।
  • गलत जानकारी देने पर: ₹50,000 का जुर्माना।
  • यदि गलती खाताधारक की है तो बैंक उससे वसूली कर सकता है।
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Quick Reference Cheat Sheet – आयकर अधिनियम: क्या बदला? (1961 बनाम 2025)

नीचे दिया गया तुलनात्मक चार्ट पुराने और नए आयकर ढांचे के बीच मुख्य अंतर को एक नज़र में समझने के लिए तैयार किया गया है।

विषय (Topic)पुरानी व्यवस्था (1961 Act)नई व्यवस्था (2025 Act)मुख्य प्रभाव
मुख्य शब्दावलीPrevious & Assessment YearTax Year (कर वर्ष)समझने में सरल
नकद निकासी TDSधारा 194Nधारा 393(3)नया सेक्शन कोड
TDS गणना का आधारकेवल सीमा से अधिक राशि परसंपूर्ण संचयी राशि परअधिक टैक्स कटौती
ITR फाइलिंग शर्तTDS हेतु ITR इतिहास अनिवार्यशर्त समाप्त (Uniform)बैंकों के लिए आसान
TDS छूट फॉर्मफॉर्म 15G और 15Hएकीकृत फॉर्म 121एक ही फॉर्म सबके लिए
बिना PAN वाले फॉर्मफॉर्म 60 और 61फॉर्म 97 और 98नया रिपोर्टिंग फॉर्मेट
स्टैंडर्ड डिडक्शन₹50,000₹75,000₹25,000 की अतिरिक्त बचत
विदेशी टूर TCS5% / 20% (जटिल स्लैब)फ्लैट 2% (Flat 2%)मिडिल क्लास को राहत
MACT ब्याजकर योग्य (Taxable)पूर्णतः कर-मुक्त (Exempt)पीड़ितों को बड़ी राहत
NR प्रॉपर्टी TDSTAN लेना अनिवार्य थाकेवल PAN पर्याप्त हैप्रशासनिक सरलीकरण

Quick Takeaway

नया अधिनियम भाषा, फॉर्म, TDS/TCS लॉजिक और रिपोर्टिंग सिस्टम को अधिक सरल, एकरूप और digital-friendly बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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निष्कर्ष – आम करदाता के लिए क्या करें?

आयकर अधिनियम 2025 का मुख्य उद्देश्य कर व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाना है। इसके लिए आपको निम्न कदम उठाने चाहिए:

  • अपना PAN सक्रिय रखें – बिना PAN के 20% की उच्च दर पर TDS कटेगा।
  • पुराने फॉर्म 15G/15H की जगह अब फॉर्म 121 बैंक में जमा करें।
  • बड़े नकद लेन-देन करते समय TDS सीमाओं का ध्यान रखें।
  • MACT मुआवजे पर अब ITR दाखिल करने की जरूरत नहीं – ब्याज पूरी तरह कर-मुक्त है।
  • विदेश में पैसा भेजने से पहले TCS दरों की नई जानकारी लें।
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अस्वीकरण (Disclaimer)

महत्वपूर्ण सूचना: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। यह विश्लेषण आयकर अधिनियम 2025 और वित्त अधिनियम 2026 की मूल अधिसूचनाओं पर आधारित है।

यद्यपि इस लेख को तैयार करने में पूर्ण सावधानी और बैंकिंग विशेषज्ञता का उपयोग किया गया है, फिर भी कर कानून (Tax Laws) अत्यंत जटिल और समय-समय पर परिवर्तनशील होते हैं। इस लेख की व्याख्या को अंतिम कानूनी सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी वित्तीय लेनदेन, कर कटौती या निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले कृपया किसी प्रमाणित चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या कर सलाहकार से आधिकारिक परामर्श अवश्य लें।

‘Finance In A Nutshell’ या लेखक, इस लेख में दी गई जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय से होने वाली वित्तीय या कानूनी हानि के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे। कानून की किसी भी व्याख्या में विवाद की स्थिति में, भारत सरकार द्वारा जारी मूल राजपत्र (Gazette) और आधिकारिक सर्कुलर को ही अंतिम और मान्य स्रोत माना जाना चाहिए।