Bank Death Claim Settlement Process: नॉमिनी और बिना नॉमिनी के बैंक से पैसा कैसे निकालें?

A complete vector guide based on RBI rules for bank death claim settlement showing a supportive money handover to a family.
INTRODUCTION

बैंक में जमा पैसे (FD, सेविंग अकाउंट, लॉकर) कैसे क्लेम करें

किसी प्रियजन का निधन न केवल एक भावनात्मक क्षति है, बल्कि यह परिवार के सामने कई वित्तीय चुनौतियां भी खड़ी कर देता है। मृतक की मेहनत की कमाई (FD, बचत खाता, लॉकर) को सम्मानपूर्वक और कानूनी रूप से प्राप्त करना वारिसों का अधिकार है।

अक्सर जानकारी के अभाव में लोग बैंक के चक्कर काटते रहते हैं। यह मैनुअल आपको RBI के नवीनतम नियमों और बैंकिंग की जमीनी हकीकत से रूबरू कराएगा, ताकि आप 15 दिनों के भीतर अपना हक पा सकें।

Immediate Action

भाग 1: तुरंत करने वाले कार्य (Immediate Action Checklist)

क्लेम की फाइल तैयार करने से पहले इन महत्वपूर्ण कड़ियों को सुनिश्चित करें:

  • मृत्यु प्रमाण पत्र (Priority #1): सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी मूल मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करें (कोशिश करें कि यह 7–10 दिनों के भीतर बन जाए)
  • अकाउंट इन्वेंटरी: मृतक के सभी खातों (Saving, FD, RD) और लॉकर की सूची उनके बैंक और ब्रांच के साथ तैयार करें।
  • नॉमिनेशन स्टेटस: शुरुआती तौर पर बैंक पासबुक या स्टेटमेंट देखकर यह जांचने की कोशिश करें कि किस खाते में नॉमिनी दर्ज है। लेकिन ध्यान दें (Crucial Note): यह कतई ज़रूरी नहीं है कि नॉमिनी का नाम पासबुक या FD की रसीद (Receipt) पर छपा ही हो। कई बार बैंक इसे पासबुक या रसीद पर प्रिंट नहीं करते हैं। इसलिए, केवल पासबुक पर भरोसा न करें। नॉमिनी की एकदम पक्की जानकारी के लिए सीधे बैंक की शाखा (Branch) जाकर ही संपर्क करें। बैंक कर्मचारी अपने कंप्यूटर रिकॉर्ड्स (CBS सिस्टम), फिजिकल नॉमिनी रजिस्टर, या फिर मृतक के ऑरिजनल ‘अकाउंट ओपनिंग फॉर्म’ (Account Opening Form) को चेक करके आपको सटीक जानकारी दे देंगे कि किस खाते में कौन नॉमिनी है।
  • पारिवारिक सहमति: परिवार के साथ बैठकर तय करें कि मुख्य दावेदार (Main Claimant) कौन होगा। उदाहरण के लिए, यदि मृतक के 5 कानूनी वारिस हैं, तो बैंक हर किसी के खाते में अलग-अलग पैसा नहीं भेजता है। परिवार को आपसी सहमति से किसी एक व्यक्ति को मुख्य दावेदार चुनना होता है जो सबके बिहाफ (behalf) पर पैसा रिसीव करेगा। बाकी के 4 वारिसों को एक ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (NOC) या ‘Letter of Disclaimer’ (दावा त्याग पत्र) पर हस्ताक्षर करने होंगे, जिससे बैंक को यह तसल्ली हो जाए कि उन्हें उस एक व्यक्ति (Claimant) को पूरा पैसा सौंपने पर कोई आपत्ति नहीं है। पैसा मिलने के बाद परिवार आपस में उसका बंटवारा कर सकता है।
  • स्वतंत्र गवाह: यदि लॉकर का क्लेम है, तो 2 ऐसे गवाह तैयार रखें जो बैंक के कर्मचारी या पूर्व-कर्मचारी न हों।
Practical Insight

भाग 2: क्लेम प्रक्रिया का फ्लो (Ideal vs Reality)

RBI ने क्लेम सेटलमेंट को समय-बद्ध (Time-bound) बनाया है, लेकिन व्यावहारिक रूप से इसमें कुछ चरण होते हैं:

डिजिटल पंजीकरण और URN (Day 0–3)

आजकल लगभग सभी बैंकों के पास ऑनलाइन ‘Deceased Claim’ पोर्टल हैं।

  • प्रक्रिया: पोर्टल पर विवरण भरें और स्कैन किए हुए दस्तावेज अपलोड करें।
  • URN: आवेदन के बाद आपको Unique Reference Number (URN) मिलेगा, जिससे आप क्लेम को ट्रैक कर सकते हैं।

फिजिकल वेरिफिकेशन (Day 4–10)

आप बैंक की किसी भी नजदीकी शाखा में जाकर मूल दस्तावेजों का सत्यापन करवा सकते हैं।

  • कहीं भी वेरिफिकेशन: सिर्फ होम-ब्रांच जाना अनिवार्य नहीं है।
  • डॉक्यूमेंट्स: सभी Originals साथ लेकर जाएं।

स्वीकृति और भुगतान (Day 11–30)

आदर्श समय (RBI नियम): 15 दिनों के भीतर क्लेम सेटल होना चाहिए (सभी दस्तावेज मिलने के बाद)।

हकीकत (Reality): आंतरिक बैंक एप्रूवल या दस्तावेजों की कमी (Query) के कारण इसमें 25–30 दिन भी लग सकते हैं।

Technical Insight

भाग 3: RBI Death Claim Forms Master Table (Central Reference)

यह तालिका क्लेम प्रक्रिया का केंद्र है। बैंक के फॉर्म का नाम अलग हो सकता है, लेकिन उनका उद्देश्य लगभग यही रहेगा।

Download Pack: सभी Annexure Forms डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें
मोबाइल पर बेहतर अनुभव के लिए टेबल को horizontal scroll में रखा गया है, ताकि सारे columns सही तरह दिखें।

Pro Tip: बैंक से हमेशा ‘Exact Form’ मांगें। कंटेंट वही रहेगा जो नीचे दिया गया है, बस बैंक का लोगो और नंबर अलग होगा।

सभी Annexure Forms, Download Links और Use Cases देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

अंदर आपको हर Annexure का नाम, download link, किसके लिए है, कौन भरेगा और कब use होगा, सब एक ही table में मिलेगा।

Financial Insight

भाग 4: खाते के प्रकार और सेटलमेंट के नियम

A. नॉमिनी (Nomination) दर्ज है: सबसे सरल रास्ता

नियम: केवल 3 मुख्य दस्तावेज + 15 दिन। यदि खाते में नॉमिनी है, तो बैंक केवल यह देखता है कि पैसा सही व्यक्ति को मिल रहा है।

Required Documents
  • Annex V: मास्टर क्लेम फॉर्म (Account + Locker दोनों के लिए एक ही)।
  • Death Certificate: मूल सत्यापन के साथ।
  • Nominee KYC: आधार, पैन या अन्य वैध पहचान पत्र।

बैंक की सीमा: नॉमिनी वाले केस में बैंक आपसे सक्सेशन सर्टिफिकेट या इंडेम्निटी बॉन्ड नहीं मांग सकता।

B. बिना नॉमिनी वाले खाते (No Nomination Cases)

यहाँ बैंक जोखिम (Risk) के आधार पर फैसला लेता है।

₹15 लाख तक का क्लेम (Simplified Procedure)

नियम: बैंक को किसी भी श्योरिटी (जमानतदार) की आवश्यकता नहीं है।

दस्तावेज़: Annex VI, Annex VII और (Legal Heir Certificate या Annex IX Affidavit)।

₹15 लाख से ऊपर का क्लेम

Option A: सक्सेशन सर्टिफिकेट (Civil Court से प्राप्त) – यह सबसे सुरक्षित तरीका है।

Option B: इंडेम्निटी बॉन्ड (Annex VII) + Surety (जमानतदार)। जमानतदार वह व्यक्ति होना चाहिए जिसकी आर्थिक स्थिति क्लेम राशि के बराबर हो।

Locker Rules

भाग 5: लॉकर और सुरक्षित कस्टडी (Locker Settlement)

लॉकर के मामले में केवल पैसा नहीं, बल्कि कीमती गहने और महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल होते हैं।

इन्वेंटरी प्रक्रिया (Annexure X): क्लेम स्वीकार होने के बाद बैंक 15 दिनों के भीतर लॉकर खोलने की तारीख तय करेगा।

गवाह: लॉकर दो स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में खोला जाएगा।

सामान की लिस्ट: लॉकर के अंदर जो भी सामान निकलेगा, उसकी एक विस्तृत सूची (Inventory) बनेगी जिस पर नॉमिनी और गवाहों के हस्ताक्षर होंगे।

हर्जाना: यदि बैंक इन्वेंटरी प्रक्रिया में देरी करता है, तो उसे ₹5,000 प्रतिदिन का हर्जाना देना होगा।

Legal Insight

भाग 6: कानूनी पहलू (Legal Nuances)

बैंकिंग क्लेम सीधे तौर पर उत्तराधिकार कानूनों के अधीन होते हैं। यदि मृतक ने कोई वसीयत (Will) छोड़ी है, तो बैंक प्रोबेट (Probate) के बिना भी भुगतान कर सकता है, बशर्ते वसीयत पर कोई विवाद न हो।

नाबालिग वारिस (Minor Heirs): यदि नॉमिनी नाबालिग है, तो भुगतान केवल उसके कोर्ट द्वारा नियुक्त या प्राकृतिक गार्जियन (Guardian) को किया जाएगा।

इसके अलावा, संपत्ति का बंटवारा पूरी तरह से मृतक के धर्म के पर्सनल लॉ पर निर्भर करता है, जिसे अगले भाग में विस्तार से समझाया गया है।

Legal Insight

भाग 6.5: धर्म के अनुसार Legal Heirs कौन? (Critical Missing Piece)

बिना नॉमिनेशन वाले मामलों में RBI की प्रक्रिया सभी धर्मों के लिए एक जैसी है, लेकिन Annex VI पर कौन साइन करेगा यह Personal Law पर निर्भर करता है।

महत्वपूर्ण नियम: यदि गलत heirs से Annex VI sign करवाया गया, तो क्लेम रिजेक्ट हो जाएगा। इसलिए सही heirs की पहचान करना पहला और सबसे अहम स्टेप है।
धर्मPriority HeirsShare Distributionविशेष नियमAnnex VI Sign
हिंदू/सिख/जैन/बौद्धपत्नी + सभी संतान + मातासभी का हिस्सा बराबरबेटा = बेटीसभी heirs sign करेंगे
मुस्लिम (Sunni)पत्नी + बेटे + बेटियाँ2:1 (बेटा : बेटी)Sharia Law लागूपत्नी + सभी संतान
मुस्लिम (Shia)पत्नी + संतान + माता-पिताParents alive → No siblingsShia rules लागूपत्नी + बच्चे
ईसाईWill के beneficiariesWill priorityIndian Succession ActExecutor + legatees
पारसीWill या पत्नी + बच्चेSuccession ActWill executorExecutor

Practical Examples

  • हिंदू परिवार: पत्नी + 2 बेटे + 1 बेटी → सभी sign → समान बंटवारा
  • मुस्लिम परिवार: पत्नी + 2 बेटे + 2 बेटियाँ → सभी sign → 2:1 distribution
  • ईसाई (Will): Church 50% + पत्नी 50% → Executor + पत्नी sign

Special Religious Rules

Issueहिंदूमुस्लिमईसाई
Multiple WivesSingle wife onlyसभी wives heirsSingle wife only
Adopted Childसमान अधिकारमान्य नहींसमान अधिकार
Unmarried Daughterहकहकहक
Will Limit100%1/3 तक100%

Minor Heirs: सभी धर्मों में Guardian affidavit + Court NOC जरूरी है।

RBI में क्या फर्क पड़ता है?
STEP 1: Legal heirs identify करें
STEP 2: सभी से Annex VI sign करवाएं
STEP 3: RBI process follow करें
Flow समझें:
धर्म → Legal Heirs → Annex VI Sign → RBI Process

हिंदू → पत्नी + बच्चे → सभी sign → Annex VI
मुस्लिम → पत्नी + संतान → बाद में distribution → Annex VI
ईसाई → Will → Executor → Annex VI
Practical Reality

भाग 7: विशेष स्थितियां (Special Scenarios)

FD ब्याज नियम: यदि FD समय से पहले (Pre-mature) तोड़ी जाती है, तो बैंक कोई पेनल्टी नहीं काट सकता। मृत्यु की तारीख तक अनुबंधित दर और उसके बाद बचत खाते की दर से ब्याज मिलेगा।

विदेशी मृत्यु (Foreign Death): विदेश में जारी मृत्यु प्रमाण पत्र को भारतीय दूतावास (Embassy) से प्रमाणित (Apostille) करवाना अनिवार्य है।

लापता व्यक्ति (Missing Person): ₹1 लाख तक के क्लेम के लिए केवल FIR और पुलिस की ‘नॉन-ट्रेसेबल रिपोर्ट’ पर्याप्त है। ₹1 लाख से ऊपर के लिए कोर्ट का Civil Death आदेश अनिवार्य है।

Escalation

भाग 8: हर्जाना और शिकायत (Escalation Ladder)

यदि बैंक क्लेम में देरी करता है या नियमों का पालन नहीं करता, तो आप नीचे दिए गए चरणों का पालन कर सकते हैं:

Day 16+ (Compensation): डिपॉजिट क्लेम में देरी पर Bank Rate + 4% p.a. की दर से ब्याज मांगें।

Day 30+ (Escalation): बैंक के Regional Office के नोडल ऑफिसर को लिखित शिकायत दर्ज करें।

Day 60+ (Ombudsman): RBI के बैंकिंग ओम्बुड्समैन के CMS पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
cms.rbi.org.in

Final Verdict

सारांश (Final Executive Summary)

Nominee (सबसे आसान): केवल Annex V.

बिना नॉमिनी ≤15L: Annex VI + VII + (IX या Legal Heir).

बिना नॉमिनी >15L: Annex VI + Succession Certificate (सबसे पक्का रास्ता).

धर्म का नियम (No Nominee): अपने धर्म के अनुसार सही वारिस चुनें और सभी से फॉर्म साइन करवाएं।

निष्कर्ष: बैंकिंग क्लेम सेटलमेंट आपका अधिकार है। नॉमिनेशन दर्ज करवाना परिवार के लिए सबसे बड़ा उपहार है, क्योंकि यह प्रक्रिया को 15 दिनों में समाप्त कर देता है। यदि नॉमिनी नहीं है, तो सही Annexures और सही लीगल वारिसों (Legal Heirs) की पहचान कर आप बिना किसी अनावश्यक देरी के अपना क्लेम पा सकते हैं।

FAQs

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

नीचे कुछ महत्वपूर्ण practical questions दिए गए हैं, जो क्लेम प्रक्रिया के दौरान अक्सर सामने आते हैं।

Q1. अगर जॉइंट अकाउंट (Joint Account) है और ‘Either or Survivor’ मोड लागू है, तो प्रक्रिया क्या होगी? +
उत्तर: यह बैंकिंग की सबसे आसान स्थितियों में से एक है। इसमें Annex V या VI जैसे लंबे फॉर्म भरने की ज़रूरत नहीं होती। जीवित खाताधारक (Survivor) को बैंक में केवल मृतक का मूल मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) और एक सादा आवेदन (Application) देना होता है। बैंक खाते से मृतक का नाम हटा देगा और खाता Survivor के एकल (Single) नाम से सुचारू रूप से चलता रहेगा।
Q2. क्या बैंक से क्लेम का पैसा मिलने के बाद नॉमिनी (Nominee) ही उस पैसे का असली और इकलौता मालिक बन जाता है? +
उत्तर: नहीं। यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी है। माननीय सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के अनुसार, नॉमिनी केवल एक ट्रस्टी (Caretaker) होता है। बैंक की ज़िम्मेदारी सिर्फ नॉमिनी को पैसा सौंपने तक है, लेकिन कानूनी तौर पर उस पैसे पर अधिकार मृतक के सभी कानूनी वारिसों (Legal Heirs) का ही होता है। पैसा मिलने के बाद, नॉमिनी की यह कानूनी ज़िम्मेदारी है कि वह उस राशि को वारिसों के बीच उनके हिस्से के अनुसार बांटे।
Q3. यदि मृतक के नाम पर बैंक में कोई पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड का बकाया है, तो क्लेम का क्या होगा? +
उत्तर: बैंकों के पास Right of Set-off (वसूली का अधिकार) होता है। यदि मृतक के नाम पर उसी बैंक में कोई लोन या क्रेडिट कार्ड का बकाया है, तो बैंक डेथ क्लेम का पैसा नॉमिनी या वारिसों को सौंपने से पहले अपनी बकाया राशि काट सकता है। हालांकि, यदि उस लोन पर कोई क्रेडिट लाइफ इंश्योरेंस था, तो इंश्योरेंस कंपनी लोन चुकाएगी और वारिसों को खाते का पूरा पैसा मिलेगा।
Q4. क्या डेथ क्लेम करने की कोई समय सीमा (Time Limit) है? अगर किसी को पासबुक 5 या 10 साल बाद मिले, तो क्या पैसा मिलेगा? +
उत्तर: डेथ क्लेम करने की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती। बैंक किसी भी समय सही दस्तावेज़ मिलने पर क्लेम सेटल करेगा। यदि किसी खाते में 10 साल तक कोई लेन-देन नहीं होता है, तो वह पैसा RBI के DEA Fund में ट्रांसफर हो जाता है। लेकिन वारिस तब भी बैंक के माध्यम से क्लेम करके वह राशि वापस पा सकते हैं।
Q5. क्या परिवार के सदस्य मृत्यु के तुरंत बाद मृतक के ATM कार्ड या UPI का इस्तेमाल करके खाते से पैसा निकाल सकते हैं? +
उत्तर: नहीं। यह पूरी तरह गैर-कानूनी (Illegal) है। मृत्यु के क्षण से ही मृतक का बैंक खाता कानूनी रूप से होल्ड या फ्रीज़ माना जाना चाहिए। यदि परिवार का कोई सदस्य ATM पिन या UPI का उपयोग करके पैसे निकालता है, तो भविष्य में यह Fraud माना जा सकता है और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
Q6. क्या डेथ क्लेम से मिलने वाले पैसे पर इनकम टैक्स (Income Tax) लगता है? +
उत्तर: भारत में Inheritance Tax लागू नहीं है। इसलिए मृतक से मिलने वाली मूल राशि (Principal Amount) पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है। हालांकि, मृत्यु की तारीख के बाद क्लेम सेटल होने तक उस पैसे पर जो भी ब्याज बनेगा, वह कानूनी वारिसों की आय माना जाएगा और उस पर टैक्स लग सकता है।
Q7. अगर मृतक की मूल FD रसीद (Original FD Receipt) या पासबुक खो गई है, तो क्या बैंक क्लेम रिजेक्ट कर देगा? +
उत्तर: बिल्कुल नहीं। दस्तावेज़ खो जाना एक आम बात है। बैंक आमतौर पर आपसे केवल एक Indemnity Bond for Lost Receipt भरवाएगा। इसके बाद बैंक अपने रिकॉर्ड्स के आधार पर क्लेम प्रोसेस कर देता है।
Q8. लॉकर (Locker) क्लेम में, अगर मृतक का लॉकर किराया (Rent) सालों से बकाया है, तो क्या होगा? +
उत्तर: लॉकर का सामान सौंपने से पहले बैंक अपना बकाया किराया और लेट-फीस वसूलेगा। यह राशि या तो मृतक के खाते से काटी जाएगी, या वारिसों को जमा करनी होगी। बिना बकाया चुकाए लॉकर का सामान नहीं दिया जाता।
Q9. यदि कानूनी वारिसों के बीच विवाद है और वे बैंक को नॉमिनी को पैसा देने से रोकना चाहते हैं, तो क्या होगा? +
उत्तर: बैंक केवल वकील के नोटिस पर भुगतान नहीं रोकता। भुगतान रोकने के लिए वारिसों को सक्षम न्यायालय (Civil Court) से Stay Order लाकर बैंक में जमा करना होगा। जब तक Court का आदेश नहीं आता, बैंक नॉमिनी को भुगतान कर सकता है।
Q10. मृतक का पेंशन खाता (Pension Account) होने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए? +
उत्तर: मृत्यु की सूचना बैंक को तुरंत देनी चाहिए ताकि पेंशन रुक सके। यदि मृत्यु के बाद कोई अतिरिक्त पेंशन खाते में आ गई है, तो उसे वापस किया जाएगा। इसके बाद पति/पत्नी को Family Pension चालू करवाने के लिए बैंक में अलग प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
Disclaimer

महत्वपूर्ण अस्वीकरण (Legal & Financial Disclaimer)

इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और सामान्य जागरूकता (Educational and Informational Purposes) के लिए है। इसे किसी भी प्रकार की कानूनी, वित्तीय या पेशेवर सलाह (Legal or Financial Advice) न मानें।

हालाँकि हमने RBI के दिशा-निर्देशों और बैंकिंग क्लेम की प्रक्रिया को सटीक रूप से प्रस्तुत करने का पूरा प्रयास किया है, कृपया निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:

नियमों में बदलाव: RBI की नीतियां, पर्सनल लॉ (Personal Laws), उत्तराधिकार कानून और बैंकों के आंतरिक नियम समय-समय पर बदल सकते हैं।

स्वतंत्र सलाह लें: क्लेम फॉर्म (Annexures) पर हस्ताक्षर करने, मुख्य दावेदार तय करने या किसी भी कानूनी दस्तावेज़ को प्रस्तुत करने से पहले अपनी बैंक शाखा के प्रबंधक, एक योग्य वकील (Advocate) या वित्तीय सलाहकार से स्वतंत्र रूप से परामर्श अवश्य लें।

ज़िम्मेदारी से छूट (No Liability): इस लेख में दी गई जानकारी के आधार पर उठाए गए किसी भी कदम, क्लेम में होने वाली देरी, दस्तावेज़ों के रिजेक्ट होने, या किसी भी प्रकार के वित्तीय/कानूनी विवाद के लिए लेखक या Finance In A Nutshell प्रबंधन किसी भी रूप में ज़िम्मेदार या उत्तरदायी नहीं होगा।

अंतिम बात: बैंकिंग क्लेम एक कानूनी प्रक्रिया है, अतः अपने विवेक और संबंधित संस्था के आधिकारिक नियमों का ही पालन करें।

Mohit Badola JAIIB
लेखक परिचय

Mohit Badola

JAIIB Certified

मोहित बडोला एक JAIIB प्रमाणित (JAIIB Certified) फाइनेंशियल प्रोफेशनल हैं, जिन्हें बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर में 10 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव है। “Finance In A Nutshell” के संस्थापक के रूप में, उनका उद्देश्य जटिल वित्तीय नियमों को आसान हिंदी में आम आदमी तक पहुँचाना और उन्हें जागरूक बनाना है।

References

संदर्भ (References)

नीचे दिए गए स्रोत इस लेख में शामिल नियमों, बैंकिंग प्रक्रियाओं और कानूनी संदर्भों को समझने के लिए उपयोग किए गए हैं।

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