क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है?
आप बैंक में अपनी Fixed Deposit (FD) तुड़वाने (Break) या रिन्यू करवाने गए। आपने सोचा था कि रसीद पर जो Maturity Amount लिखा है, वही पूरा पैसा आपको मिलेगा।
लेकिन, जब कैशियर ने आपको फाइनल अमाउंट बताया या पैसा आपके खाते में आया, तो वह उम्मीद से काफी कम था।
आप हैरान होकर पूछते हैं—“अरे! रसीद पर तो ज्यादा रकम लिखी थी, यह कम क्यों है?”
तब बैंक अधिकारी आपको बताता है—“सर, आपके ब्याज पर TDS (Tax) कट गया है।”
यह वो पल होता है जब सबसे ज्यादा दुख होता है। अक्सर ग्राहक मुझसे पूछते हैं—“सर, मेरी तो इनकम भी नहीं है, फिर भी बैंक ने मेरे पैसे क्यों काटे?”
इसका जवाब और समाधान दोनों आपके हाथ में है। अगर आप सही समय पर Form 15G/15H जमा कर दें, तो बैंक आपका एक रुपया भी नहीं काट पाएगा।
आज के इस आर्टिकल में, एक बैंकर (Banker) के नज़रिए से समझते हैं कि यह TDS क्यों कटता है, New Tax Regime में इसके नियम क्या हैं, और वो कौन सी गलतियां हैं जिनसे आपको बचना चाहिए।
1. FD रसीद (Receipt) का कड़वा सच: जो लिखा है, वो मिलेगा नहीं!
एक बैंकर के तौर पर, मैं सबसे पहले एक भ्रम दूर करना चाहता हूँ।
जब आप FD करवाते हैं और आपको जो रसीद (Deposit Advice) मिलती है, उस पर एक Maturity Amount (जैसे: ₹1,10,000) लिखा होता है। ग्राहक इसे “फाइनल गारंटी” मान लेता है।
लेकिन हकीकत यह है:
वह अमाउंट यह मानकर छापा जाता है कि आपका TDS शून्य (0) कटेगा।
तकनीकी रूप से रसीद पर लिखा अमाउंट “Subject to TDS” (TDS कटने की शर्तों के अधीन) होता है।
Banker’s Note: मेरी नजर में, यह हम बैंकर्स की भी जिम्मेदारी है कि हम रसीद पर एक स्पष्ट मोहर (Stamp) लगाएं कि “Maturity amount subject to submission of 15H/G”. लेकिन काम के दबाव में अक्सर यह छूट जाता है। इसलिए, रसीद पर लिखे अमाउंट को फाइनल न समझें।
2. बैंक आपकी FD पर TDS कब काटता है? (The Rules)
सबसे पहले यह जान लें कि बैंक हर FD पर टैक्स नहीं काटता। इनकम टैक्स एक्ट (Section 194A) के तहत TDS तभी कटता है जब आपका साल भर का ब्याज एक लिमिट पार कर जाता है।
लिमिट (Threshold Limit):
- आम नागरिकों (General Public) के लिए: ₹40,000 प्रति वर्ष।
- वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens – 60+ age) के लिए: ₹50,000 प्रति वर्ष।
अगर आपकी सभी ब्रांचों की FD मिलाकर ब्याज इससे ज्यादा बनता है, तो बैंक 10% TDS काट लेगा।
3. कौन भर सकता है यह फॉर्म? (New vs Old Tax Regime Update)
फॉर्म भरने की योग्यता इस बात पर निर्भर करती है कि आपकी साल की कुल कमाई (Total Income) कितनी है। इस साल (Current Financial Year) के लिए बैंकिंग सिस्टम में निम्नलिखित लिमिट्स सेट की गई हैं।
अगर आप फॉर्म में अपनी कुल आय (Total Income) इन लिमिट्स के अंदर दिखाते हैं, तो बैंक आपका फॉर्म स्वीकार (Accept) कर लेगा।
A. अगर आपने New Tax Regime चुना है (इस साल के नियम): 🆕
| फॉर्म का प्रकार | बैंक कब स्वीकार करेगा? (Income Limit) |
| Form 15G | (60 साल से कम): यदि आप अपनी कुल वार्षिक आय ₹4,00,000 या उससे कम डिक्लेयर करते हैं। |
| Form 15H | (Senior Citizen): यदि आप अपनी कुल वार्षिक आय ₹12,00,000 या उससे कम डिक्लेयर करते हैं। |
B. अगर आपने Old Tax Regime चुना है:
- Form 15G: कुल आय ₹2.5 लाख से कम होनी चाहिए।
- Form 15H: कुल आय ₹3 लाख (60+ उम्र) या ₹5 लाख (80+ उम्र) से कम होनी चाहिए।
⚠️ बैंकर का जरूरी नोट (Banker’s Note):
“न्यू टैक्स रेजीम में ₹7,00,000 तक की करयोग्य आय पर कोई टैक्स नहीं लगता, क्योंकि इस सीमा तक Section 87A के तहत पूरी टैक्स छूट मिल जाती है।
इसी नए नियम के तहत:
- 60 वर्ष से कम आयु वाले: ₹4,00,000 तक की कुल आय होने पर Form 15G दे सकते हैं।
- सीनियर सिटीजन (60+): ₹12,00,000 तक की कुल आय पर Form 15H दे सकते हैं।
ध्यान दें: यहाँ ₹4 लाख और ₹12 लाख कोई ‘टैक्स-फ्री सीमा’ नहीं हैं, बल्कि केवल ‘TDS न काटने की सुविधा’ की सीमा हैं।
यदि किसी भी व्यक्ति की आय ₹7 लाख से अधिक होती है, तो भले ही Form 15G या 15H जमा हो, आयकर रिटर्न (ITR) भरते समय वास्तविक टैक्स बन सकता है और वह जमा करना अनिवार्य होगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य टैक्स माफ़ करना नहीं, बल्कि आम जनता और बुजुर्गों को अनावश्यक TDS कटौती और बाद में रिफंड (Refund) लेने की परेशानी से बचाना है।”
4. Form 15G/15H जमा करने का सही समय (Timing is Everything)

बैंक में यह सबसे बड़ी गलती लोग करते हैं। वे फॉर्म तब लाते हैं जब टैक्स कट चुका होता है।
सही समय:
इस फॉर्म की वैलिडिटी सिर्फ एक फाइनेंशियल ईयर (1 अप्रैल से 31 मार्च) तक होती है।
- सबसे बेस्ट: हर साल 1 अप्रैल से 7 अप्रैल के बीच ही जमा कर दें।
- अभी (Current Situation): अगर आपने इस साल के लिए अभी तक फॉर्म नहीं भरा है, तो तुरंत जमा कर दें।
5. फॉर्म भरने के बाद भी TDS कट सकता है? (5 बैंकर सीक्रेट्स)

मैंने ब्रांच में ऐसे कई ग्राहक देखे हैं जिन्होंने फॉर्म भरा था, फिर भी उनका पैसा कट गया। कारण ये छोटी-छोटी गलतियां हैं:
सावधानी 1: अगर बीच में नई FD बनवाई है ⚠️
मान लीजिये आपने अप्रैल में फॉर्म भर दिया था। लेकिन, अगर आपने साल के बीच में (जैसे जुलाई में) कोई नई FD बनवाई है, तो पुराना फॉर्म उस नई FD पर काम नहीं करेगा।
- कारण: सिस्टम पुरानी FD पर ही टिक (Flag) लगाता है।
- समाधान: नई FD बनते ही उसके लिए दोबारा फॉर्म भरें।
सावधानी 2: “मैंने तो 5 साल की FD कराई है…” ⚠️
बहुत से लोग 5 साल की FD करवाते हैं और सोचते हैं फॉर्म भी 5 साल चलेगा।
- हकीकत: फॉर्म हर साल 31 मार्च को Expire हो जाता है।
- समाधान: चाहे FD 10 साल की हो, आपको हर साल अप्रैल में नया फॉर्म भरना ही पड़ेगा।
सावधानी 3: वरिष्ठ नागरिक और SCSS खाता 👴
अगर आप सीनियर सिटीजन हैं और आपका SCSS (Senior Citizen Savings Scheme) खाता भी है, तो याद रखें कि SCSS का ब्याज भी Taxable है।
- गलती: बुजुर्ग फॉर्म में सिर्फ FD का नंबर लिखते हैं।
- समाधान: फॉर्म भरते समय विशेष रूप से SCSS खाता नंबर भी लिखें, वरना FD का टैक्स बचेगा पर SCSS का कट जाएगा।
आजकल बैंक में हाथ से फॉर्म भरने का झंझट कम हो गया है। आप बैंक जाते हैं, अधिकारी सिस्टम से एक Auto-filled Form प्रिंट करता है और आप उस पर साइन कर देते हैं।
यही आपसे चूक हो जाती है!
- बैंकिंग का अंदरूनी सच: बैंक का मुख्य सॉफ्टवेयर (CBS) आपकी FDs का रिकॉर्ड रखता है, लेकिन SCSS (Senior Citizen Savings Scheme) जैसी सरकारी योजनाओं का रिकॉर्ड अक्सर एक अलग मॉड्यूल में होता है जिसे “Govt. Business Module” कहते हैं।
- गलती: जब अधिकारी मुख्य सिस्टम से फॉर्म प्रिंट करता है, तो कई बार उसमें सिर्फ FDs आती हैं और SCSS छूट जाता है क्योंकि वह दूसरे मॉड्यूल में है।
- क्या करें: साइन करने से पहले उस प्रिंटेड फॉर्म को ध्यान से पढ़ें। चेक करें कि उसमें आपकी FD के साथ-साथ SCSS का अकाउंट नंबर छपा है या नहीं।
- अगर नहीं है: तो अधिकारी को तुरंत टोकें और कहें—“मेरा SCSS खाता Govt. Business Module में खोलकर वहां भी टैक्स माफ़ी (Tax Waiver) मार्क करें।”
सावधानी 4: PAN और Aadhaar लिंकिंग 🔗
यह सबसे नया नियम है।
- अगर आपका PAN आपके Aadhaar से लिंक नहीं है, तो इनकम टैक्स विभाग आपके PAN को “Inoperative” (निष्क्रिय) मानता है।
- ऐसे में बैंक का सिस्टम आपके Form 15G/15H को Reject कर देगा और सीधा 20% टैक्स काटेगा।
सावधानी 5: “7 तारीख” से पहले की कोशिश (A Small Hope) 🗓️
अक्सर TDS कटने का कोई SMS नहीं आता। आपको पैसा हाथ में आने पर ही पता चलता है कि टैक्स कट गया।
लेकिन, नियम के मुताबिक, बैंक काटे गए टैक्स को अगले महीने की 7 तारीख तक सरकार को भेजता है।
- एक छोटी सी संभावना: अगर आपको महीने की शुरुआत (1 से 7 तारीख के बीच) में पता चल जाए कि टैक्स कट गया है, तो तुरंत बैंक मैनेजर से मिलें।
- अगर बैंक ने अभी तक टैक्स सरकार को नहीं भेजा है, तो कुछ बैंकों के सिस्टम में इसे Reverse (वापस) करने का विकल्प हो सकता है।
- नोट: यह हर बैंक की अपनी पॉलिसी और सॉफ्टवेयर पर निर्भर करता है। यह आपका अधिकार नहीं, बल्कि एक कोशिश है।
6. फॉर्म जमा करने के 2 आसान तरीके
तरीका 1: Net Banking / Mobile App (सबसे आसान)
- लॉगिन करें > ‘Service Request’ या ‘Tax’ सेक्शन में जाएं।
- ‘Form 15G/15H’ आप्शन चुनें और Submit कर दें।
तरीका 2: बैंक ब्रांच जाकर (Offline)
- काउंटर से फॉर्म मांगें।
- अपना PAN नंबर और FD/SCSS अकाउंट नंबर सही-सही भरें।
- हस्ताक्षर करके जमा करें और रसीद (Receiving) जरूर लें।
निष्कर्ष (Conclusion)
TDS कटना कोई नुकसान नहीं है, यह सरकार का नियम है। लेकिन अगर आप टैक्स के दायरे में नहीं आते, तो Form 15G/15H जमा करना आपका अधिकार है।
मेरी सलाह यही है: “तारीख का इंतज़ार मत कीजिये।” अपना PAN-Aadhaar स्टेटस चेक करें और अगर फॉर्म नहीं भरा है, तो आज ही जमा करें।
FAQs (Frequently Asked Questions)
Q1. क्या मुझे Form 15G/15H एक बार भरने के बाद दोबारा भरने की जरूरत नहीं है?
Ans: जी नहीं, यह फॉर्म केवल एक वित्तीय वर्ष (1 Financial Year) के लिए मान्य होता है। हर साल 1 अप्रैल को यह एक्सपायर हो जाता है। आपको हर साल अप्रैल के पहले हफ्ते में इसे दोबारा बैंक में जमा करना होगा।
Q2. बैंक ने मेरा TDS काट लिया है, क्या बैंक उसे वापस (Refund) कर सकता है?
Ans: नहीं। एक बार बैंक ने TDS काटकर सरकार (Income Tax Dept) के पास जमा कर दिया, तो बैंक उसे वापस नहीं कर सकता। अपना कटा हुआ पैसा वापस पाने के लिए आपको जुलाई में अपना ITR (Income Tax Return) भरना होगा, वहां से आपको रिफंड मिल जाएगा।
Q3. क्या Recurring Deposit (RD) के लिए भी यह फॉर्म भरना जरुरी है?
Ans: हाँ, बिल्कुल। बैंक TDS काटते समय आपकी FD (Fixed Deposit) और RD (Recurring Deposit) दोनों का ब्याज जोड़ता है। अगर कुल ब्याज ₹40,000/₹50,000 से ज्यादा है, तो RD पर भी टैक्स कटेगा। इसलिए फॉर्म दोनों के लिए लागू होता है।
Q4. क्या NRI (Non-Resident Indian) यह फॉर्म भर सकते हैं?
Ans: नहीं। Form 15G/15H केवल निवासी भारतीयों (Resident Indians) के लिए हैं। एनआरआई (NRI) ग्राहकों के लिए TDS के नियम अलग होते हैं और वे यह फॉर्म जमा नहीं कर सकते।
Q5. अगर मैंने फॉर्म में गलत जानकारी दी (झूठ बोला) तो क्या होगा?
Ans: यह कानूनन अपराध है। अगर आपकी आय टैक्सेबल है और फिर भी आपने टैक्स बचाने के लिए झूठ बोलकर Form 15G/15H जमा किया, तो इनकम टैक्स एक्ट की धारा 277 के तहत आप पर जुर्माना लग सकता है और कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
⚠️ Disclaimer (अस्वीकरण)
इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों (Educational Purposes) और सामान्य जागरूकता के लिए है। हालाँकि, यह जानकारी बैंकिंग नियमों और आयकर कानूनों (Income Tax Rules) के वर्तमान प्रावधानों (जनवरी 2026 तक) पर आधारित है, लेकिन कर नियम (Tax Laws) समय-समय पर बदलते रहते हैं।
कृपया ध्यान दें:
मैं एक पेशेवर बैंकर हूँ, लेकिन यह लेख मेरे व्यक्तिगत अनुभव और ज्ञान पर आधारित है। इसे किसी भी बैंक या संस्था का आधिकारिक बयान न माना जाए।
हर व्यक्ति की वित्तीय स्थिति और टैक्स देनदारी (Tax Liability) अलग होती है। कोई भी वित्तीय निर्णय लेने या फॉर्म जमा करने से पहले अपने CA (Chartered Accountant) या वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।
लेखक या वेबसाइट किसी भी प्रकार की वित्तीय हानि, TDS कटौती या कानूनी कार्रवाई के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

